अब घर-घर परखी जाएगी आयोडीन नमक की गुणवत्ता

15-Sep-2017

गोंडा: आयोडीन की कमी से होने वाली बीमारियों से बचाने की पहल शुरू हो गई है। इसके लिए राष्ट्रीय आयोडीन अल्पता विकार नियंत्रण कार्यक्रम देवीपाटन मंडल के गोंडा व बहराइच जिलों के साथ ही सूबे के २४ जिलों में शुरू की जा रही है। इसके तहत घरों में प्रयोग किए जाने वाले नमक के नमूनों की जांच की जाएगी। इसके लिए आशाओं को टेङ्क्षस्टग किट दिया जाएगा। स्वास्थ्य अधिकारियों की मानें तो आयोडीन एक पोषक तत्व है। यह हमारे शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के लिए बहुत आवश्यक है। आयोडीन की कमी से घेंघा ही नहीं बल्कि बहरापन, गूंगापन, मानसिक विकृतियां तथा अपंगता जैसी व्याधियां भी हो रही हैं, इनसे बचाव के लिए आयोडीन युक्त नमक का सेवन सबसे सस्ता उपाय है। वैसे भारत सरकार पहले ही आयोडीन रहित नमक की बिक्री पर पहले ही रोक लगा चुकी है। बावजूद इसके मरीजों की संख्या को देखते हुए कार्यक्रम शुरू किया गया है। इसके तहत प्रत्येक आशा को प्रतिमाह एक साल्ट टेङ्क्षस्टग किट दी जाएगी, जिससे ५० घरों के नमक के नमूनों की जांच की जाएगी। इसमें सीएचसी, पीएचसी व आंगनबाड़ी केंद्रों पर भी नमक की जांच की जाएगी। इनसेट इन जिलों में चलेगा कार्यक्रम - गोंडा, बहराइच, सुल्तानपुर, रायबरेली, लखीमपुर खीरी, फैजाबाद, आगरा, अलीगढ़, आजमगढ़, बुलंदशहर, बरेली, बस्ती, बिजनौर, देवरिया, गाजियाबाद, गोरखपुर, जौनपुर, मथुरा, मुजफ्फरनगर, वाराणसी, शाहजहांपुर, रामपुर, सहारनपुर एवं पीलीभीत। ---------------- राष्ट्रीय आयोडीन अल्पता विकार नियंत्रण कार्यक्रम के तहत आयोडीन की जांच करायी जानी है। महानिदेशक स्वास्थ्य का निर्देश मिला है, संबंधित गोंडा व बहराइच जिलों के सीएमओ को इस संबंध में कार्रवाई करने को कहा गया है। - डॉ. सतीश कुमार, अपर निदेशक स्वास्थ्य, देवीपाटन मंडल